Other Popular Posts

Most Popular Article's

Career Counselling & Services

Psychometric Tests:

21st Century Skills & Learning Test:

Samas : Definition, Importance, Types, Tatpurush

4.5/5
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

समास (Samas) हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भाषा को संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाने में मदद करता है। समास का शाब्दिक अर्थ है ‘संकलन’ या ‘संक्षिप्तता’, जहाँ दो या अधिक शब्द आपस में मिलकर एक नया और अर्थपूर्ण शब्द बनाते हैं। यह प्रक्रिया न केवल वाक्यों को छोटा करती है, बल्कि भाषा की अभिव्यक्ति को भी सरल और प्रभावशाली बनाती है। उदाहरण के लिए, ‘राजा का महल’ को ‘राजमहल’ कहना, समास का ही उदाहरण है। समास के अध्ययन से न केवल हमारी व्याकरणिक समझ गहरी होती है, बल्कि यह प्रतियोगी परीक्षाओं और साहित्यिक लेखन में भी उपयोगी साबित होता है। 

समास की परिभाषा (Definition of Samas)

1. समास का अर्थ

समास Samas का शाब्दिक अर्थ है ‘संकलन’ या ‘संक्षेपण’। इसमें दो या अधिक शब्द मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं।

2. शब्दों का संक्षिप्त रूप

समास का उपयोग शब्दों को संक्षिप्त और अर्थपूर्ण बनाने के लिए किया जाता है। उदाहरण: ‘राजा का महल’ = ‘राजमहल’।

3. व्याकरणिक प्रक्रिया

यह एक व्याकरणिक प्रक्रिया है जिसमें शब्दों के मध्य से विभक्तियों को हटाकर उन्हें एकीकृत किया जाता है।

4. नए शब्द का निर्माण

समास में नए शब्द का निर्माण होता है, जो पहले से अधिक स्पष्ट और संक्षिप्त होता है।

5. अर्थ का विस्तार

समास में जुड़े शब्द न केवल अर्थ को सरल बनाते हैं, बल्कि उसे विस्तृत भी करते हैं।

6. शब्दों के बीच संबंध

समास शब्दों के बीच एक गहरा व्याकरणिक और अर्थपूर्ण संबंध स्थापित करता है।

7. समास की पहचान

जहाँ दो या अधिक शब्द मिलकर एक ऐसा शब्द बनाते हैं जो पूरे वाक्य का अर्थ दे सके, वहाँ समास होता है।

8. हिंदी भाषा में उपयोगिता

हिंदी भाषा में समास का व्यापक उपयोग साहित्य, लेखन, और बोलचाल में किया जाता है।

9. उदाहरण से परिभाषा

‘गंगा का जल’ = ‘गंगाजल’। इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि समास कैसे काम करता है।

10. प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्व

समासSamas हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे प्रतियोगी परीक्षाओं में विशेष रूप से पूछा जाता है।

समास का महत्व (Importance of Samas)

समास हिंदी भाषा और व्याकरण का एक अनिवार्य हिस्सा है, जो न केवल भाषा को संक्षिप्त बनाता है बल्कि उसे अधिक प्रभावशाली और सरल भी बनाता है। समास का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

1. भाषा को संक्षिप्त बनाना

समास शब्दों और वाक्यों को छोटा करता है, जिससे भाषा अधिक सरल और सुगम बनती है। उदाहरण: ‘गंगा का जल’ को ‘गंगाजल’ कहना।

2. वाक्य को प्रभावशाली बनाना

समास Samas का उपयोग वाक्य की संरचना को प्रभावशाली और आकर्षक बनाने में मदद करता है। यह लेखन और बोलचाल में विशेष महत्व रखता है।

3. समय और स्थान की बचत

समास का उपयोग समय और स्थान की बचत करता है, विशेष रूप से साहित्य और पत्रकारी लेखन में।

4. भाषा की सुंदरता बढ़ाना

समास के प्रयोग से भाषा की सौंदर्यात्मकता बढ़ती है। यह शब्दों को अधिक कलात्मक और अर्थपूर्ण बनाता है।

5. जटिलता को सरल बनाना

जटिल वाक्यों को समास के माध्यम से सरल और समझने योग्य बनाया जा सकता है।

6. साहित्यिक लेखन में उपयोगिता

साहित्यिक रचनाओं, जैसे कविता और गद्य में समास का उपयोग भाषा को अधिक संक्षिप्त और लयबद्ध बनाता है।

7. व्याकरणिक संबंध को दर्शाना

समास Samas शब्दों के बीच व्याकरणिक और अर्थपूर्ण संबंध को स्पष्ट करता है।

8. प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्व

समास का अध्ययन प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

9. भाषा की व्यावहारिकता

समास भाषा को व्यावहारिक और उपयोगी बनाता है, जिससे इसे आम जीवन में आसानी से अपनाया जा सके।

10. संस्कृति और परंपरा का दर्पण

समास के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक मिलती है, क्योंकि इसमें शब्दों का गहरा अर्थ और इतिहास छिपा होता है।

समास के प्रमुख प्रकार (Types of Samas)

क्रमांकसमास का प्रकारपरिभाषाउदाहरण
1तत्पुरुष समास Samasइसमें पहला पद प्रधान होता है और दूसरा पद उसके अर्थ को स्पष्ट करता है।राजमहल (राजा का महल)
2कर्मधारय समास Samasइसमें दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और विशेषण-विशेष्य का संबंध बनाते हैं।नीलगगन (नीला गगन)
3द्विगु समास Samasइसमें पहले पद संख्यावाचक होता है और दूसरा पद संज्ञावाचक होता है।पंचवटी (पाँच वृक्षों का समूह)
4द्वंद्व समास Samasइसमें दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और ‘या’, ‘और’ का भाव प्रकट करते हैं।माता-पिता (माता और पिता)
5बहुव्रीहि समास Samasइसमें दोनों पद मिलकर किसी तीसरे का बोध कराते हैं, और इसका अर्थ दोनों पदों से अलग होता है।चक्रधारी (जिसके पास चक्र हो)
6अव्ययीभाव समास Samasइसमें पहला पद प्रधान होता है और दूसरा पद अव्यय रूप में रहता है।यथासमय (समय के अनुसार)

तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas)

1. परिभाषा

तत्पुरुष समास वह समास है जिसमें पहला पद प्रधान होता है और दूसरा पद उसके अर्थ को स्पष्ट करता है। इस समास में पहले पद का कोई विशेष अर्थ नहीं होता, बल्कि वह दूसरे पद से मिलकर एक नया अर्थ उत्पन्न करता है।

2. व्याकरणिक संरचना

तत्पुरुष समास में पहले शब्द का संबंध दूसरे शब्द से होता है, और यह द्वितीय शब्द के अर्थ को स्पष्ट करता है। उदाहरण के लिए, “राजमहल” (राजा का महल)।

3. अर्थ का विस्तार

इस समास में पहले शब्द का अर्थ दूसरे शब्द के साथ मिलकर नया अर्थ उत्पन्न करता है। यह समास वाक्य को संक्षिप्त और अर्थपूर्ण बनाता है।

4. उदाहरण

  • राजमहल (राजा का महल)
  • गंगाजल (गंगा का जल)
  • दुर्गमहा (दुर्ग का महल)

5. प्रधान और गौण पद

तत्पुरुष समास में पहला शब्द प्रधान होता है और दूसरा शब्द उसका गौण (उपयुक्त) होता है, जो पहले शब्द का अर्थ स्पष्ट करता है।

6. समास के भेद

तत्पुरुष समास Samas के विभिन्न भेद होते हैं जैसे:

  • विशेषण समास
  • विशेष्य समास
  • कर्म समास
  • संबंध समास

7. तत्पुरुष समास के रूप

तत्पुरुष समास के रूप में ‘का’, ‘की’, ‘के’, ‘वाला’, ‘वाली’ आदि का प्रयोग किया जाता है।

8. व्याकरणिक रूपांतरण

इस समास को सामान्यत: ‘का’, ‘की’, ‘के’ जैसे संबोधन से जोड़ा जाता है, जो हिंदी भाषा में प्रचलित है। उदाहरण: “राजा का महल” = “राजमहल”।

9. तत्पुरुष समास का महत्व

यह समास भाषा को संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाने में मदद करता है। इसके द्वारा एक लंबे वाक्य को छोटे और अर्थपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है।

10. प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगिता

तत्पुरुष समास को प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है, इसलिए इसका अध्ययन महत्वपूर्ण है। यह प्रश्न अक्सर समास के विभिन्न प्रकारों और उनके उदाहरणों के रूप में पूछा जाता है।

सारांश

तत्पुरुष समास हिंदी भाषा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो वाक्य को संक्षिप्त और अर्थपूर्ण बनाता है। यह समास विशेष रूप से हिंदी साहित्य और व्याकरण में प्रयुक्त होता है और इसका सही उपयोग भाषा को सरल और प्रभावशाली बनाता है।

कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas)

1. परिभाषा

कर्मधारय समास Samas वह समास है जिसमें दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और एक-दूसरे के गुण, विशेषण या संबंध को व्यक्त करते हैं। इसमें दोनों शब्द एक साथ मिलकर एक नया अर्थ उत्पन्न करते हैं, जिसमें दोनों का योगदान बराबरी का होता है।

2. व्याकरणिक संरचना

कर्मधारय समास में दोनों शब्दों के बीच समानता और संबंध होता है, और ये दोनों शब्द एक साथ मिलकर किसी विशेष अर्थ का निर्माण करते हैं। उदाहरण: “नील गगन” (नीला गगन)।

3. अर्थ का संतुलन

इस समास में दोनों शब्दों का अर्थ बराबरी का होता है। उदाहरण के लिए, “नील गगन” में दोनों शब्द (नील और गगन) समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।

4. उदाहरण

  • नील गगन (नीला आकाश)
  • सिंहपंख (सिंह का पंख)
  • स्वर्ण आभूषण (सोने का आभूषण)
  • मधुर गीत (मीठा गीत)

5. विशेषण और विशेष्य का संबंध

कर्मधारय समास में एक शब्द दूसरे शब्द का विशेषण करता है, लेकिन दोनों शब्द समान रूप से महत्व रखते हैं। उदाहरण: “मधुर गीत” (गीत जो मधुर हो)।

6. शब्दों का संयोजन

इस समास में दो शब्द मिलकर एक नया अर्थ उत्पन्न करते हैं, जो दोनों शब्दों के संयोजन से स्पष्ट होता है।

7. रचनात्मकता और व्याकरण

कर्मधारय समास भाषा को रचनात्मक और लचीला बनाता है, क्योंकि इसमें दोनों शब्द मिलकर किसी नई विशेषता या गुण को व्यक्त करते हैं।

8. संज्ञा और विशेषण का मिश्रण

कर्मधारय समास में संज्ञा और विशेषण दोनों मिलते हैं। यह समास उन शब्दों के लिए होता है, जिनमें दोनों का प्रभाव बराबरी से होता है।

9. वाक्य की लयबद्धता

कर्मधारय समास का उपयोग वाक्य को लयबद्ध और संगीतमय बनाने में किया जाता है, क्योंकि यह शब्दों को एक साथ जोड़कर उन्हें एक नृत्यात्मक रूप प्रदान करता है।

10. प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्व

कर्मधारय समास का अध्ययन प्रतियोगी परीक्षाओं में विशेष रूप से किया जाता है, क्योंकि यह व्याकरण के महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। इसके उदाहरण और प्रयोगों के बारे में सवाल अक्सर पूछे जाते हैं।

सारांश

कर्मधारय समास हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें दो समान रूप से महत्वपूर्ण शब्द मिलकर एक नया अर्थ उत्पन्न करते हैं। यह समास भाषा को सुंदर और अर्थपूर्ण बनाता है, और प्रतियोगी परीक्षाओं में इसका महत्व बहुत अधिक है। 

द्विगु समास (Dvigoo Samas)

1. परिभाषा

द्विगु समास वह समास है जिसमें पहले पद में संख्यावाचक शब्द होता है और दूसरे पद में संज्ञा या विशेषण होता है। इसमें पहले पद का उपयोग संख्यात्मक संदर्भ में किया जाता है और यह दूसरे शब्द के साथ मिलकर एक नया शब्द बनाता है।

2. संख्यावाचक शब्द का प्रयोग

द्विगु समास में पहले पद का मुख्य उद्देश्य संख्यावाचक होना है। उदाहरण के लिए, “पंचवटी” (पाँच वृक्षों का समूह)।

3. दोनों शब्दों का सामूहिक अर्थ

इस समास में पहले शब्द (संख्यावाचक) और दूसरे शब्द (संज्ञा या विशेषण) मिलकर एक विशेष अर्थ उत्पन्न करते हैं।

4. उदाहरण

  • पंचवटी (पाँच वृक्षों का समूह)
  • द्वादशद्वार (बारह द्वार)
  • त्रिवेणी (तीन नदियों का संगम)
  • सप्तपदी (सात कदम)

5. संज्ञा और संख्या का संयोजन

इस समास में संज्ञा और संख्यावाचक शब्द का संयोजन होता है, जिससे संज्ञा की संख्या को स्पष्ट किया जाता है।

6. विशेषताएँ

  • संख्यावाचक शब्द पहले आता है।
  • संज्ञा या विशेषण दूसरा शब्द होता है।
  • समास में संख्यात्मकता का स्पष्ट संकेत होता है।

7. समास का उद्देश्य

द्विगु समास Samas का उद्देश्य संख्यावाचक शब्दों के साथ किसी वस्तु, स्थान या समूह की पहचान करना है।

8. द्विगु समास का महत्व

यह समास विशेष रूप से वस्तुओं के समूह या संख्याओं से संबंधित नामकरण में उपयोगी होता है। यह संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से संख्यात्मक जानकारी प्रदान करता है।

9. वाक्य में उपयोग

द्विगु समास का प्रयोग वाक्य को संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाने में किया जाता है। यह लंबे वाक्यों को छोटे, अर्थपूर्ण शब्दों में व्यक्त करता है।

10. प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगिता

द्विगु समास प्रतियोगी परीक्षाओं में एक महत्वपूर्ण विषय है। इससे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इसे समझना और अभ्यास करना आवश्यक है।

सारांश

द्विगु समास हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो संख्यावाचक शब्दों के संयोजन से एक नया और संक्षिप्त अर्थ उत्पन्न करता है। यह समास भाषा को अधिक स्पष्ट और संक्षिप्त बनाता है, और प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

समास के भेद, उदाहरण सहित

क्रमांक समास का प्रकार परिभाषा उदाहरण
1 तत्पुरुष समास इसमें पहला शब्द प्रधान होता है और दूसरा शब्द उसके अर्थ को स्पष्ट करता है। राजमहल (राजा का महल), गंगाजल (गंगा का जल)
2 कर्मधारय समास इसमें दोनों शब्द समान रूप से प्रधान होते हैं और एक-दूसरे के गुण या विशेषता को व्यक्त करते हैं। नील गगन (नीला आकाश), मधुर गीत (मीठा गीत)
3 द्विगु समास इसमें पहला शब्द संख्यावाचक होता है और दूसरा शब्द संज्ञा या विशेषण होता है। पंचवटी (पाँच वृक्षों का समूह), त्रिवेणी (तीन नदियों का संगम)
4 द्वंद्व समास इसमें दोनों शब्द समान रूप से प्रधान होते हैं और ‘और’, ‘या’ का भाव प्रकट करते हैं। माता-पिता (माता और पिता), राम-सीता (राम और सीता)
5 बहुव्रीहि समास इसमें दोनों पद मिलकर किसी तीसरे का बोध कराते हैं, और इसका अर्थ दोनों पदों से अलग होता है। चक्रधारी (जिसके पास चक्र हो), राजपुत्र (राजा का पुत्र)
6 अव्ययीभाव समास इसमें पहला शब्द प्रधान होता है और दूसरा शब्द अव्यय रूप में रहता है। यथासमय (समय के अनुसार), नित्यप्रति (हर रोज)

बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas)

1. परिभाषा

बहुव्रीहि समास वह समास है जिसमें दोनों पद मिलकर किसी तीसरे का बोध कराते हैं। इसमें समास का अर्थ दोनों शब्दों से अलग होता है और यह किसी व्यक्ति, वस्तु, या स्थान के बारे में कोई विशेष गुण या पहचान बताता है।

2. व्याकरणिक संरचना

बहुव्रीहि समास में दोनों शब्द मिलकर एक ऐसा अर्थ उत्पन्न करते हैं, जो पहले से निर्धारित नहीं होता, बल्कि वह एक विशेषता या गुण का प्रतिनिधित्व करता है।

3. संज्ञा का नया रूप

इस समास में, दोनों शब्द मिलकर एक नया संज्ञा रूप बनाते हैं, जो किसी तीसरी वस्तु या व्यक्ति का बोध कराता है। उदाहरण के लिए, “चक्रधारी” (जिसके पास चक्र हो)।

4. उदाहरण

  • चक्रधारी (जिसके पास चक्र हो, जैसे भगवान विष्णु)
  • राजपुत्र (राजा का पुत्र)
  • कुंभकर्ण (जिसका कर्ण बड़ा हो, रामायण के पात्र)
  • लंबोदर (जिसका पेट बड़ा हो, भगवान गणेश का नाम)
  • नीलमणि (जो नील रंग की मणि हो)

5. बहुव्रीहि समास में गुण का व्यक्तिकरण

यह समास किसी वस्तु या व्यक्ति के विशेष गुण या लक्षण को व्यक्त करता है। उदाहरण: नीलमणि (नीले रंग की मणि)।

6. संज्ञा और विशेषण का संयोजन

बहुव्रीहि समास में संज्ञा और विशेषण दोनों का संयोजन होता है, लेकिन इसका परिणाम किसी तीसरी वस्तु का नामकरण होता है।

7. व्याकरणिक महत्व

बहुव्रीहि समास हिंदी व्याकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह एक ही शब्द से विस्तृत और गहरे अर्थ को व्यक्त करता है।

8. वाक्य में उपयोग

यह समास वाक्य को संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाने में मदद करता है, क्योंकि यह विशेषताओं या गुणों को एक ही शब्द में व्यक्त कर देता है।

9. प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगिता

बहुव्रीहि समास हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण भाग है और यह प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।

10. समास का उद्देश्य

बहुव्रीहि समास का मुख्य उद्देश्य किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान के गुण या विशेषता को संक्षिप्त रूप में व्यक्त करना है। यह समास शब्दों को संक्षिप्त, प्रभावशाली और अर्थपूर्ण बनाता है।

सारांश

बहुव्रीहि समास एक महत्वपूर्ण प्रकार का समास है जिसमें दोनों शब्द मिलकर किसी तीसरे का बोध कराते हैं। यह समास किसी विशेष गुण, पहचान या विशेषता को व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है और हिंदी व्याकरण में इसका विशेष महत्व है। 

 

Freqently Asked Questions (FAQs)

1. समास Samas क्या है?

समास Samas वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया शब्द बनाया जाता है, जो पहले से अधिक संक्षिप्त और अर्थपूर्ण होता है।

2. समास Samas के कितने प्रकार होते हैं?

समास Samas के पांच प्रमुख प्रकार होते हैं:

तत्पुरुष समास
कर्मधारय समास
द्विगु समास
द्वंद्व समास
बहुव्रीहि समास

3. तत्पुरुष समास क्या है?

तत्पुरुष समास में पहले शब्द का अर्थ दूसरे शब्द के माध्यम से स्पष्ट होता है, जैसे राजमहल (राजा का महल)।

4. कर्मधारय समास का उदाहरण क्या है?

कर्मधारय समास में दोनों शब्द समान रूप से प्रधान होते हैं। उदाहरण: नील गगन (नीला आकाश), स्वर्ण आभूषण (सोने का आभूषण)।

5. द्विगु समास का क्या अर्थ है?

द्विगु समास में पहला शब्द संख्यावाचक होता है और दूसरा शब्द संज्ञा या विशेषण होता है। उदाहरण: पंचवटी (पाँच वृक्षों का समूह), सप्तपदी (सात कदम)।

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

Tags

MAT ANSWER KEY, SYLLABUS, SAMPLE PAPER

Request a call back !

Request a Call Back